मेरे मन में भी शिव, मेरे तन में भी शिव | Full Shiv Bhajan | Lyrical #meretanmebhishiv

https://youtu.be/szl6VEMCnj8

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मेरे मन में भी शिव,
मेरे तन में भी शिव,
रोम रोम में समाया तेरा नाम रे
हाय मेरी साँसों में तेरा ही नाम रे
जैसे भस्म में शिव,
जैसे चंदा में शिव,
नीले अम्बर में समाया तेरा नाम रे
हाय मेरी साँसों में तेरा ही नाम रे
जैसे गंगा में शिव,
जैसे कैलाश में शिव,
कण कण में बसा है तेरा नाम रे
हाय मेरी साँसों में तेरा ही नाम रे
जैसे योगी में शिव,
जैसे साधु में शिव,
तप और त्याग में समाया तेरा नाम रे
हाय मेरी साँसों में तेरा ही नाम रे
जैसे मौन में शिव,
जैसे ध्यान में शिव,
शून्य शून्य में बसाया तेरा नाम रे
हाय मेरी साँसों में तेरा ही नाम रे
जैसे रुद्र में शिव,
जैसे शंबू में शिव,
सृष्टि प्रलय में समाया तेरा नाम रे,
हाय मेरी साँसों में तेरा ही नाम रे
जैसे नाद में शिव,
जैसे ओंकार में शिव,
हर एक धुनी में समाया तेरा नाम रे,
हाय मेरी साँसों में तेरा ही नाम रे
जैसे दुख में भी शिव,
जैसे हार में शिव,
हर इक दिशा में बसाया तेरा नाम रे,
हाय मेरी साँसों में तेरा ही नाम रे
जैसे बंदन मे शिव,
जैसे मुक्ति मे शिव,
हर इक दशा मे समाया तेरा नाम रे
हाय मेरी साँसों में तेरा ही नाम रे
जैसे दुप मे भी शिव,
जैसे छाँव में भी शिव,
सुख दुख दोनों मे समाया तेरा नाम रे
हाय मेरी साँसों में तेरा ही नाम रे
जैसे प्रश्न मे भी शिव,
जैसे उत्तर मे शिव
हर एक सोच मे समाया तेरा नाम रे
हाय मेरी साँसों में तेरा ही नाम रे
जैसे आज में शिव,
जैसे कल में भी शिव,
वक्त वक्त मे समाया तेरा नाम रे
हाय मेरी साँसों में तेरा ही नाम रे
जैसे हार में शिव,
जैसे जीत में शिव,
हर हाल मे समाया तेरा नाम रे
हाय मेरी साँसों में तेरा ही नाम रे
जैसे कारण मे शिव
जैसे करने मे शिव
कोने कोने मे समाया तेरा नाम रे
हाय मेरी साँसों में तेरा ही नाम रे
जैसे सत्य में शिव,
जैसे सुंदर में शिव,
हर गुण मे समाया तेरा नाम रे
हाय मेरी साँसों में तेरा ही नाम रे
जैसे ज्ञान में शिव,
जैसे दान में शिव,
ऋषि मुनियों ने सुनाया तेरा नाम रे
हाय मेरी साँसों में तेरा ही नाम रे
मेरे मन में भी शिव,
मेरे तन में भी शिव,
रोम रोम में समाया तेरा नाम रे
हाय मेरी साँसों में तेरा ही नाम रे
जैसे खो जाने मे शिव,
जैसे मिल जाने मे शिव,
भटके मन को लाया तेरा नाम रे
हाय मेरी साँसों में तेरा ही नाम रे
मेरे मन में भी शिव,
मेरे तन में भी शिव,
रोम रोम में समाया तेरा नाम रे
हाय मेरी साँसों में तेरा ही नाम रे
जैसे बिन बोले भी शिव,
जैसे कहने मे शिव,
हर बात मे समाया तेरा नाम रे
हाय मेरी साँसों में तेरा ही नाम रे
मेरे मन में भी शिव,
मेरे तन में भी शिव,
रोम रोम में समाया तेरा नाम रे
हाय मेरी साँसों में तेरा ही नाम रे
जैसे अकेले मे शिव,
जैसे साथ मे भी शिव,
हर पल साथ निभाए तेरा नाम रे
हाय मेरी साँसों में तेरा ही नाम रे
मेरे मन में भी शिव,
मेरे तन में भी शिव,
रोम रोम में समाया तेरा नाम रे
हाय मेरी साँसों में तेरा ही नाम रे
जैसे उम्मीद में शिव,
जैसे इंतजार मे शिव,
भीगड़े काम बनाए तेरा नाम रे
हाय मेरी साँसों में तेरा ही नाम रे
मेरे मन में भी शिव,
मेरे तन में भी शिव,
रोम रोम में समाया तेरा नाम रे
हाय मेरी साँसों में तेरा ही नाम रे
मेरे मन में भी शिव,
मेरे तन में भी शिव,
रोम रोम में समाया तेरा नाम रे
हाय मेरी साँसों में तेरा ही नाम रे

मेरे मन में भी शिव, मेरे तन में भी शिव, रोम रोम में समाया तेरा नाम रे: शिव भक्ति और समर्पण का सार

भगवान शिव केवल एक देवता नहीं हैं, वे एक चेतना हैं, एक अनंत शक्ति हैं जो ब्रह्मांड के कण-कण में विद्यमान हैं। शिव भक्ति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि भक्त अपने आराध्य को केवल मंदिर में नहीं, बल्कि अपने भीतर महसूस करता है। इसी भाव को बहुत ही सुंदरता से व्यक्त करती हैं ये पंक्तियाँ: “मेरे मन में भी शिव, मेरे तन में भी शिव, रोम रोम में समाया तेरा नाम रे।”

यह लेख इस अद्भुत भजन के माध्यम से शिव की सर्वव्यापकता, जीवन के हर पहलू में उनकी उपस्थिति और भक्ति की शक्ति की व्याख्या करता है।

1. प्रकृति और ब्रह्मांड में शिव का वास

जब हम अपनी आँखों से इस सृष्टि को देखते हैं, तो हमें हर जगह उसी परम शक्ति का आभास होता है। भजन की शुरुआती पंक्तियाँ हमें बताती हैं कि चाहे वह भस्म हो, चंद्रमा हो, नीला आकाश हो या पवित्र गंगा, हर जगह शिव हैं।

प्रकृति के सौंदर्य को निहारते हुए एक भक्त का हृदय यही गाता है कि मेरे मन में भी शिव, मेरे तन में भी शिव, रोम रोम में समाया तेरा नाम रे। चाहे कैलाश की ऊँचाइयाँ हों या गंगा की लहरें, हर कण में उसी महाकाल की गूँज है। यह अनुभूति हमें यह अहसास दिलाती है कि हम प्रकृति से अलग नहीं हैं, बल्कि शिव के माध्यम से उससे जुड़े हुए हैं।

2. ध्यान, योग और शून्यता में शिव

शिव आदि योगी हैं। वे ध्यान की गहराइयों में हैं और मौन की शांति में भी। जब एक साधक अपनी आँखों को बंद करता है और बाहरी शोर को त्यागकर भीतर की यात्रा शुरू करता है, तो उसे उस ‘शून्य’ में भी शिव मिलते हैं।

तप और त्याग की अग्नि में जलकर कुंदन बनता हुआ योगी जब अपनी समाधि में लीन होता है, तो उसकी हर श्वास यही कहती है: “मेरे मन में भी शिव, मेरे तन में भी शिव, रोम रोम में समाया तेरा नाम रे।” चाहे वह ओंकार की ध्वनि (नाद) हो या पूर्ण मौन, शिव की उपस्थिति हर उस स्थान पर है जहाँ चित्त एकाग्र होता है।

3. सुख-दुख और जीवन के द्वंद्व में शिव

जीवन हमेशा एक जैसा नहीं रहता। कभी धूप है तो कभी छाँव, कभी जीत है तो कभी हार। लेकिन शिव भक्त जानता है कि परिस्थितियाँ बदल सकती हैं, पर शिव का साथ नहीं।

जब जीवन में दुख आता है या हम हार का सामना करते हैं, तो अक्सर मनुष्य टूट जाता है। लेकिन जिसे यह ज्ञान हो कि हर दिशा में, हर दशा में शिव हैं, वह कभी अकेला महसूस नहीं करता।

  • दुख और हार में: जब उम्मीद टूटती है, तब भी भक्त को संबल मिलता है, क्योंकि उसे पता है कि मेरे मन में भी शिव, मेरे तन में भी शिव, रोम रोम में समाया तेरा नाम रे
  • सुख और जीत में: सफलता के क्षणों में भी अहंकार को त्यागकर भक्त यही मानता है कि यह सब शिव की कृपा है।

सुख-दुख, धूप-छाँव और बंधन-मुक्ति—इन सभी द्वंद्वों से परे जो सत्य है, वह शिव हैं।

4. समय और काल के परे: महाकाल का स्वरूप

शिव समय से परे हैं, वे महाकाल हैं। जो ‘आज’ में है, वही ‘कल’ में भी होगा। वक्त का पहिया घूमता रहता है, लेकिन शिव का नाम शाश्वत है।

भजन की पंक्तियाँ “जैसे आज में शिव, जैसे कल में भी शिव” हमें यह सिखाती हैं कि समय की हर करवट में ईश्वर हमारे साथ है। जब हम अपने भूत और भविष्य की चिंता छोड़ देते हैं और वर्तमान क्षण में जीते हैं, तो यह अहसास गहरा हो जाता है कि मेरे मन में भी शिव, मेरे तन में भी शिव, रोम रोम में समाया तेरा नाम रे

5. सत्य, सौंदर्य और ज्ञान का प्रतीक

“सत्यम शिवम सुंदरम”—जो सत्य है, वही शिव है और वही सुंदर है। ज्ञान का प्रकाश हो या दान की महिमा, हर श्रेष्ठ गुण में शिव समाहित हैं। ऋषि-मुनियों ने युगों-युगों से जिस ज्ञान को सुनाया है, उसका सार यही है कि परमात्मा हमसे दूर नहीं है।

जब हम सत्य की राह पर चलते हैं और अपने कर्मों में पवित्रता लाते हैं, तो हमारा अंतर्मन स्वतः ही पुकार उठता है: “मेरे मन में भी शिव, मेरे तन में भी शिव, रोम रोम में समाया तेरा नाम रे।”

6. अकेलेपन और साथ का साथी

आज के दौर में मनुष्य भीड़ में भी अकेला महसूस करता है। लेकिन शिव भक्त कभी अकेला नहीं होता। चाहे वह एकांत में बैठा हो या अपनों के बीच, उसे हर पल शिव का साथ महसूस होता है।

  • उम्मीद और इंतजार: जब सारे रास्ते बंद नजर आते हैं, बिगड़े काम बनाने की उम्मीद केवल शिव से होती है।
  • खोना और पाना: मन जब भटकता है, तो उसे राह दिखाने वाला नाम भी शिव का ही है।

भटके हुए मन को जब राह मिलती है, तो आत्मा शांति से भर जाती है और फिर से वही धुन गूँजती है— मेरे मन में भी शिव, मेरे तन में भी शिव, रोम रोम में समाया तेरा नाम रे

निष्कर्ष

यह भजन केवल शब्दों का मेल नहीं है, बल्कि आत्म-साक्षात्कार की एक यात्रा है। यह हमें सिखाता है कि ईश्वर को खोजने के लिए कहीं बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है। वे हमारे प्रश्नों में हैं, हमारे उत्तरों में हैं, हमारी सोच में हैं और हमारी श्वासों में हैं।

जब हम इस भाव को अपने जीवन में उतार लेते हैं कि मेरे मन में भी शिव, मेरे तन में भी शिव, रोम रोम में समाया तेरा नाम रे, तो जीवन का हर भय समाप्त हो जाता है और परम शांति की प्राप्ति होती है।

ॐ नमः शिवाय

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